Thursday, October 31, 2013


Essence: Sweet children, forget everything, including your bodies and remember the one Father, for only then will you be called 
real children. Your intellects should now be removed from this old world. 

Question: In which children's intellects will the knowledge easily sit? 
Answer: All the knowledge easily sits in the intellects of poor children who have destroyed their attachment and whose intellects 
are broad and unlimited. Those who think "This is my wealth" or "My husband" cannot imbibe knowledge and they cannot claim 
a high status. To remember lokik relationships even after belonging to the Father means your engagement is not firm. They are 
called stepchildren. 

Song: To live in Your lane and to die in Your lane. 

Essence for dharna: 

1. Have all your relationships with the One and remove your intellect’s yoga from the innumerable bondages. Have a firm engagement 
with the One alone. Don't allow your intellect's yoga to wander. 

2. Become a murlidhar, like the Father. Don't have any arrogance of having read the murli very well. Like a cloud, fill yourself and shower 
everywhere. You have studied and so you should establish a centre. 

Blessing: May you be an easy yogi and finish the game of changing poses by stabilising your mind in an elevated position. 

Whatever is the position of your mind is visible in the pose of your face. Some children sometimes carry a lot of burden and they thereby 
become heavy. Sometimes, because of the sanskar of thinking too much, they become taller than one could ever imagine. Sometimes, 
because of being disheartened, they see themselves as very small. Look at your poses as a detached observer and change all those 
various poses by stabilising your mind in an elevated position and you will then be called an easy yogi. 

Slogan: A soul who has a right to the mine of happiness remains constantly happy and shares happiness. 

Murli-[31-10-2013]- Hindi

मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - देह सहित सब कुछ भूल एक बाप को याद करो तब कहेंगे मातेले बच्चे, 
इस पुरानी दुनिया से अब तुम्हारी बुद्धि हट जानी चाहिए'' 

प्रश्न:- बाप का ज्ञान किन बच्चों की बुद्धि में सहज ही बैठ जाता है? 
उत्तर:- जो गरीब बच्चे हैं, जिनका मोह नष्ट है और बुद्धि विशाल है उनकी बुद्धि में सारा ज्ञान सहज बैठ 
जाता है। बाकी जिनकी बुद्धि में रहता - हमारा धन, हमारा पति........ वह ज्ञान को धारण कर ऊंच पद 
नहीं पा सकते। बाप का बनने के बाद भी लौकिक सम्बन्धों को याद करना माना कच्ची सगाई है, 
उन्हें सौतेला कहा जाता है। 

गीत:- मरना तेरी गली में........ 

धारणा के लिए मुख्य सार:- 

1) एक के साथ सर्व सम्बन्ध रख बुद्धियोग अनेक बन्धनों से निकाल लेना है। एक के साथ पक्की 
सगाई करनी है। बुद्धियोग भटकाना नहीं है। 

2) बाप समान मुरलीधर बनना है, मैंने अच्छी मुरली चलाई - इस अहंकार में नहीं आना है। बादल 
भरकर वर्षा करनी है। पढ़ाई की है तो सेन्टर जमाना है। 

वरदान:- मन को श्रेष्ठ पोजीशन में स्थित कर पोज़ बदलने के खेल को समाप्त करने वाले सहजयोगी भव 

जैसी मन की पोज़ीशन होती है वह चेहरे के पोज़ से दिखाई देती है। कई बच्चे कभी-कभी बोझ उठाकर 
मोटे बन जाते हैं, कभी बहुत सोचने के संस्कार के कारण अन्दाज से भी लम्बे हो जाते हैं और कभी 
दिलशिकस्त होने के कारण अपने को बहुत छोटा देखते हैं। तो अपने ऐसे पोज़ साक्षी होकर देखो और 
मन की श्रेष्ठ पोज़ीशन में स्थित हो ऐसे भिन्न-भिन्न पोज़ परिवर्तन करो तब कहेंगे सहजयोगी। 

स्लोगन:- खुशियों के खान की अधिकारी आत्मा सदा खुशी में रहती और खुशी बांटती है। 

Wednesday, October 30, 2013


Essence: Sweet children, never miss the study. There will be an interest in studying when there is unbroken faith in the Father who is teaching 
you. Only the children who have faith in their intellects are able to do service. 

Question: On hearing what news of the children does BapDada become very pleased?
Answer: When children write their service news: “Baba, today I explained to so-and-so and gave him the introduction of the two fathers and 
did this type of service,” Baba becomes very pleased to read such letters. Baba’s stomach doesn't become full on receiving letters of just love 
and remembrance and your well-being. Baba is pleased to see His helper children. This is why you should do service and write that news to Baba. 

Song: Come mother, let us go.

Essence for dharna: 

1. Have faith in the intellect and definitely study. Never have any doubts about any situation. Victory is guaranteed when there is faith. 

2. Become a companion of the Father and a complete helper in establishing heaven. Become a true Brahmin who looks after the sacrificial fire.

Blessing: May you be an embodiment of total success and become an easy yogi by having a close relationship and all attainments. 

Children who constantly have a close relationship and also experience all attainments experience yoga easily. They always have the experience of 
belonging to the Father anyway. They do not need to be reminded of being a soul, a child of God, but, in this intoxication, they constantly experience 
themselves to be embodiments of attainments. They remain stable in elevated zeal, enthusiasm and happiness and a constantly powerful stage and 
they therefore become embodiments of total success. 

Slogan: Those who maintain spiritual pride can never have any desire for limited honour or respect. 

Murli-[30-10-2013]- Hindi

मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - पढ़ाई कभी भी मिस नहीं करना, पढ़ाई का शौक तब रहेगा जब 
पढ़ाने वाले बाप में अटूट निश्चय होगा, निश्चय बुद्धि बच्चे ही सार्विस कर सकेंगे'' 

प्रश्न:- बापदादा को बच्चों की कौन-सी बात सुनकर बहुत खुशी होती है? 
उत्तर:- जब बच्चे सार्विस समाचार का पत्र लिखते हैं - बाबा, आज हमने फलाने को समझाया, 
उसको दो बाप का परिचय दिया.... ऐसे-ऐसे सेवा की। तो बाबा उन पत्रों को पढ़कर बहुत खुश 
होते हैं। याद-प्यार वा खुश ख़ैराफत का पत्र लिखने से बाबा का पेट नहीं भरता। बाबा अपने 
मददगार बच्चों को देख खुश होते हैं इसलिए सर्विस करके समाचार लिखना है। 

गीत:- चलो चले माँ...... 

धारणा के लिए मुख्य सार:- 

1) निश्चय बुद्धि बन पढ़ाई करनी है। कभी भी किसी बात में संशय नहीं उठाना है। निश्चय 
में ही विजय है। 

2) बाप का साथी बन स्वर्ग की स्थापना में पूरा मददगार बनना है। यज्ञ की सम्भाल करने 
वाला पक्का ब्राह्मण बनना है। 

वरदान:- समीप सम्बन्ध और सर्व प्राप्ति द्वारा सहजयोगी बनने वाले सर्व सिद्धि स्वरूप भव 

जो बच्चे सदा समीप सम्बन्ध में रहते हैं और सर्व प्राप्तियों का अनुभव करते हैं उन्हें सहजयोग 
का अनुभव होता है। वे सदा यही अनुभव करते कि मैं हूँ ही बाप का। उन्हें याद दिलाना नहीं 
पड़ता कि मैं आत्मा हूँ, मैं बाप का बच्चा हूँ। लेकिन सदा इसी नशे में प्राप्ति स्वरूप अनुभव 
करते, सदा श्रेष्ठ उमंग-उत्साह और खुशी में एकरस रहते, सदा शक्तिशाली स्थिति में रहते 
इसलिए सर्व सिद्धि स्वरूप बन जाते हैं। 

स्लोगन:- रूहानी शान में रहने वाले कभी हद के मान शान में नहीं आ सकते। 

Tuesday, October 29, 2013

Murli-[29-10-2013]- Hindi

मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - देह के सम्बन्धों में बंधन है, इसलिए दु:ख है, देही के सम्बन्ध में 
रहो तो अथाह सुख मिल जायेगा, एक मात-पिता की याद रहेगी'' 

प्रश्न:- किस नशे में रहो तो माया पर जीत पाने की हिम्मत आ जायेगी? 
उत्तर:- नशा रहे कि कल्प-कल्प हम बाप की याद से माया दुश्मन पर विजयी बन हीरे जैसा 
बने हैं। खुद खुदा हमारा मात-पिता है, इसी स्मृति वा नशे से हिम्मत आ जायेगी। हिम्मत 
रखने वाले बच्चे विजयी अवश्य बनते हैं और सदा गॉडली सार्विस पर ही तत्पर रहते हैं। 

गीत:- तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है....... 

धारणा के लिए मुख्य सार:- 

1) मेरा तो एक सर्वोत्तम टीचर दूसरा न कोई - इसी निश्चय से मात-पिता समान पढ़ाई पढ़नी है। 
पुरूषार्थ में पूरा फालो करना है। 

2) देह के बंधन को बुद्धि से तोड़ना है। दैवी मत पर चल सदा हर्षित रहना है। ईश्वरीय सेवा करनी है। 

वरदान:- एक हिम्मत की विशेषता द्वारा सर्व का सहयोग प्राप्त कर आगे बढ़ने वाली विशेष आत्मा भव 

जो बच्चे हिम्मत रखकर, निर्भय होकर आगे बढ़ते हैं उन्हें बाप की मदद स्वत: मिलती है। हिम्मत की 
विशेषता से सर्व का सहयोग मिल जाता है। इसी एक विशेषता से अनेक विशेषतायें स्वत: आती जाती 
हैं। एक कदम आगे रखा और अनेक कदम सहयोग के अधिकारी बने। इसी विशेषता का औरों को भी 
दान और वरदान देते रहो अर्थात् विशेषता को सेवा में लगाओ तो विशेष आत्मा बन जायेंगे। 

स्लोगन:- बुद्धि से इतने हल्के रहो जो बाप अपनी पलकों पर बिठाकर साथ ले जाये। 


Essence: Sweet children, there is bondage in relationships of the body, therefore there is sorrow. Stay in the relationship of 
the soul and you will receive limitless happiness and remain in remembrance of the one Mother and Father. 

Question: Which intoxication should you maintain so that you have the courage to conquer Maya?
Answer: Have the intoxication that you have stayed in remembrance of the Father every cycle, that you have become victorious 
over Maya, your enemy, and become like a diamond. God Himself is our Mother and Father. With this awareness and intoxication, 
you will receive courage. Children who have courage definitely become victorious and they constantly remain engaged in Godly service. 

Song: The heart desires to call out to You.

Essence for dharna: 

1. Mine is the one most elevated Teacher and none other. With this faith, study like the mother and father. Follow them fully in your efforts. 

2. Break the bondages of the body away from your intellect. Follow divine directions and remain constantly cheerful. Do God’s service.

Blessing: May you receive everyone’s co-operation and move forward with your speciality of courage and become a special soul. 

Children who have courage and fearlessly move forward automatically receive the Father’s help. With your speciality of courage you 
receive everyone’s co-operation. With this one speciality, you automatically develop many other specialities. You take one step forward 
and have a right to many steps of co-operation. Continue to give the donation and blessing of this speciality to others, that is, use your 
speciality in service and you will become a special soul. 

Slogan: Remain so light in your intellect that the Father sits you on His eyelids and takes you with Him. 

Monday, October 28, 2013

Murli-[28-10-2013]- Hindi

मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - तुम्हें बड़ा विचित्र उस्ताद मिला है, तुम उसकी श्रीमत पर चलो 
तो डबल सिरताज देवता बन जायेंगे'' 

प्रश्न:- पढ़ाई में कभी भी थकावट न आये उसका सहज पुरूषार्थ क्या है? 
उत्तर:- पढ़ाई के बीच में जो कभी निंदा-स्तुति, मान-अपमान होता है, उसमें स्थिति समान 
रहे, उसे एक खेल समझो तो कभी थकावट नहीं आयेगी। सबसे जास्ती निंदा तो कृष्ण की 
हुई है, कितने कलंक लगाये हैं, फिर ऐसे कृष्ण को पूजते भी हैं। तो यह गाली मिलना कोई 
नई बात नहीं है इसलिए पढ़ाई में थकना नहीं है, जब तक बाप पढ़ा रहे हैं, पढ़ते रहना है। 

गीत:- बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम...... 

धारणा के लिए मुख्य सार:- 

1) सर्व की मनोकामनायें पूर्ण करने वाली कामधेनु (जगदम्बा) बनना है। दान देते रहना है। 

2) स्तुति-निंदा में स्थिति समान रखनी है। यह सब होते पढ़ाई नहीं छोड़नी है। इसे खेल समझ 
पार करना है। 

वरदान:- सदा स्नेह और सहयोग द्वारा अविनाशी रत्न का टाइटल प्राप्त करने वाले अमरभव 

जो स्थापना के कार्य में सदा स्नेही और सहयोगी रहते हैं उन्हें अविनाशी रत्न का टाइटल मिल 
जाता है। ऐसे अविनाशी रत्न जो कभी कोई भी हिला न सके। कोई भी रूकावट रोक न सके। 
ऐसे अविनाशी रत्न ही अमरभव के वरदानी हैं। रीयल गोल्ड हैं, बाप के साथी हैं। वे बाप के 
कार्य को अपना समझते हैं। सदा साथ रहते हैं इसलिए अविनाशी बन जाते हैं। 

स्लोगन:- पवित्रता की यथार्थ धारणा है तो हर कर्म यथार्थ और युक्तियुक्त होगा। 


Essence: Sweet children, you have found the unique Master. Follow His shrimat and you will become double-crowned deities. 

Question: What is the easy effort for you not to become tired of the study? 
Answer: Maintain equanimity in your stage in the praise and defamation, regard and disregard that happens in the study. 
Consider all of that to be a game and you will never become tired. Krishna has been defamed the most. People have accused 
him of so many things and yet they also worship such a Krishna. Therefore, receiving insults is not a new thing, so never become 
tired of the study. Continue to study for as long as the Father teaches you. 

Song: O Dweller of the Forest, Your name is the support of my life! 

Essence for dharna: 

1. You have to become Kamdhenu (Jagadamba), one who fulfils everyone's desires. Continue to donate. 

2. Maintain equanimity in your stage in praise and defamation. While all of that happens, you mustn't stop studying. Consider all of 
it to be a game and cross over it. 

Blessing: May you be immortal and receive the title of an imperishable jewel through your constant love and co-operation. 

Those who are constantly loving and co-operative in the task of establishment receive the title of an imperishable jewel. Such 
imperishable jewels that no one can ever shake them and no obstruction can ever stop them. Only such imperishable jewels 
receive the blessing of being immortal. They are real gold and the Father’s companions. They consider the Father’s task to be 
their task. They remain constantly with the Father and thereby become imperishable. 

Slogan: When you have the accurate dharna of purity, your every deed becomes accurate and yuktiyukt. 

Sunday, October 27, 2013


27-10-2013 (AM REVISED 03-04-1996) Together with doing service, become free from your old and wasteful sanskars by having an attitude of unlimited disinterest. Blessing: May you be a hero actor who constantly plays an elevated part by considering yourself to be on the unlimited stage. All of you are the show-pieces who are placed in the showcase of the world. In the midst of the unlimited souls, you are on the biggest stage of all. Speak every word and perform every action in the awareness that the souls of the world are watching you. By doing so, your every part will be elevated and you will become a hero actor. Everyone has the feeling of receiving attainment from you instrument souls. So, children of the Bestower, constantly continue to give and continue to fulfil everyone’s hopes. Slogan: When you have the power of truth within you, you will continue to receive happiness and power.


27-10-13 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ``अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज 03-04-96 मधुबन 

``सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो'' 

वरदान:- स्वयं को बेहद की स्टेज पर समझ सदा श्रेष्ठ पार्ट बजाने वाले हीरो पार्टधारी भव 

आप सब विश्व के शोकेस में रहने वाले शोपीस हो, बेहद की अनेक आत्माओं के बीच बड़े 
ते बड़ी स्टेज पर हो। इसी स्मृति से हर संकल्प, बोल और कर्म करो कि विश्व की आत्मायें 
हमें देख रही हैं इससे हर पार्ट श्रेष्ठ होगा और हीरो पार्टधारी बन जायेंगे। सभी आप निमित्त 
आत्माओं से प्राप्ति की भावना रखते हैं तो सदा दाता के बच्चे देते रहो और सर्व की आशायें 
पूर्ण करते रहो। 

स्लोगन:- सत्यता की शक्ति पास हो तो खुशी और शक्ति प्राप्त होती रहेगी। 

Saturday, October 26, 2013


मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - बाप की आश है बच्चे पूरा-पूरा नष्टोमोहा बनें, जब पक्का 
वायदा करें - बाबा, आप हमारे, हम आपके, तब सच्ची प्रीत जुटे'' 

प्रश्न:- रूद्र शिवबाबा द्वारा रचे हुए यज्ञ और मनुष्यों द्वारा रचे जा रहे यज्ञों में मुख्य अन्तर क्या है? 
उत्तर:- मनुष्य जो भी यज्ञ रचते, उसमें जौ-तिल आदि स्वाहा करते, वह मैटेरियल यज्ञ हैं। 
बाप ने जो यज्ञ रचा है यह अविनाशी ज्ञान यज्ञ है, इसमें सारी पुरानी दुनिया स्वाहा हो 
जाती है। 2- वह यज्ञ थोड़े समय तक चलते, यह यज्ञ जब तक विनाश न हो तब तक 
चलता रहेगा। जब तुम बच्चे कर्मातीत अवस्था तक पहुँचेंगे तब यज्ञ की समाप्ति होगी। 

गीत:- निर्बल से लड़ाई बलवान की........ 

धारणा के लिए मुख्य सार:- 

1) इस अविनाशी ज्ञान यज्ञ में अपने इस रथ सहित सब कुछ स्वाहा करना है। 
सार्विस के लिए बहुत-बहुत चुस्त और फुर्त बनना है। 

2) माया कितनी भी गर्म हो, सावधान रह उसके थप्पड़ से स्वयं को बचाना है। घबराना नहीं है। 

वरदान:- अपने आदि और अन्त दोनों स्वरूप को सामने रख खुशी व नशे में रहने वाले स्मृति स्वरूप भव 

जैसे आदि देव ब्रह्मा और आदि आत्मा श्रीकृष्ण दोनों का अन्तर दिखाते भी साथ दिखाते हो। 
ऐसे आप सब अपना ब्राह्मण स्वरूप और देवता स्वरूप दोनों को सामने रखते हुए देखो कि 
आदि से अन्त तक हम कितनी श्रेष्ठ आत्मायें रही हैं। आधाकल्प राज्य भाग्य प्राप्त किया 
और आधाकल्प माननीय, पूज्यनीय श्रेष्ठ आत्मा बनें। तो इसी नशे और खुशी में रहने से 
स्मृति स्वरूप बन जायेंगे। 

स्लोगन:- जिनके पास ज्ञान का अथाह धन है, उन्हें सम्पन्नता की अनुभूति होती है।


Essence: Sweet children, the Father’s desire is that you children become full destroyers of attachment. When you make this firm promise: 
Baba, You are mine and I am Yours, true love can be forged. 

Question: What is the main difference between the sacrificial fire created by Rudra Shiv Baba and those that are created by human beings?
Answer: 1) Whatever sacrificial fires human beings create are material sacrificial fires in which they put sesame seeds and other grains. 
This sacrificial fire that the Father has created is the imperishable sacrificial fire of knowledge into which the whole of the old world is 
sacrificed. 2) Those sacrificial fires continue for a short time whereas this sacrificial fire will continue until destruction takes place. 
When you children reach your karmateet stage, this sacrificial fire will end. 

Song: This is a battle of the strong with the weak. 

Essence for dharna: 

1. You have to sacrifice everything you have, including your chariot, into this imperishable sacrificial fire of the knowledge. 
Remain very, very alert and active for service. 

2. No matter how hot Maya is, remain cautious and save yourself from being slapped by her. Don’t be afraid.

Blessing: May you be an embodiment of remembrance and stay in happiness and intoxication by keeping both your original and final 
forms in front of you. 

Although the difference between Adi Dev Brahma and the first soul, Shri Krishna, is shown they are shown together. In the same way, keep 
both your Brahmin form and your deity form in front of you and see to what extent you have been elevated souls from the beginning to the end. 
For half the cycle, you attained your fortune of the kingdom and for half the cycle, you became an elevated, praiseworthy soul and worthy of 
worship. By maintaining this intoxication and happiness, you will become an embodiment of remembrance. 

Slogan: Those who have plenty of the wealth of knowledge experience fullness.

Friday, October 25, 2013


मुरली सार:- ``मीठे-बचे - तुम आमाओं को अपना-अपना रथ है, म हँ िनराकार, मुझे भी कप म एक ही बार रथ चािहए, म ा का अनुभवी वृ रथ उधार लेता हँ'' न:- िकस िनचय के आधार पर शरीर का भान भूलना अित सहज है? उर:- तुम बच ने िनचय से कहा - बाबा, हम आपके बन गये, तो बाप का बनना माना ही शरीर का भान भूलना। जैसे िशवबाबा इस रथ पर आता और चला जाता, ऐसे तुम बचे भी ैटस करो इस रथ पर आने-जाने क। अशरीरी बनने का अयास करो। इसम मुकल का अनुभव नह होना चािहए। अपने को िनराकारी आमा समझ बाप को याद करो। गीत:- ओम् नमो िशवाए........ धारणा के लए मुय सार:- 1) राजऋिष बन तपया करनी है। पूयनीय माला म आने के लए बाप समान सािवस करनी है। पका योगी बनना है। 2) नॉलेज बड़ी मज़े क है, इसलए रमणीकता से पढ़ना है, मूँझना नह है। वरदान:- माटर नॉलेजफुल बन 5 हजार वष क जम पी को जानने वाले वदशन चधारी भव जो अभी वदशन चधारी बनते ह वही भिवय म चवत राय-भाय के अधकारी बनते ह। वदशन चधारी अथात् अपने सारे च के अदर सव िभ-िभ पाट को जानने वाले। आप बचे िवशेष इस समय 5 हजार वष क जमपी को जानकर माटर नॉलेजफुल बन गये। सभी ने यह िवशेष बात जान ली िक इस अतम जम म हीरे तुय जीवन बनाने से सारे कप के अदर हीरो पाट बजाने वाले बन जाते ह। लोगन:- अपने साथय को भी बाप के संग का रंग लगाओ तो उनके संग का रंग आपको नह लगेगा।


Essence: Sweet children, you souls have your own chariots. I am incorporeal. Only once in the cycle do I need a chariot. I borrow the old experienced chariot of Brahma. Question: On the basis of what faith is it very easy to forget the awareness of the body? Answer: You children have said with faith: Baba, I now belong to You. Therefore, to belong to the Father means to forget the awareness of your body. Just as Shiv Baba enters this chariot and then leaves, in the same way, you children also have to practise entering your chariots and then leaving. Practise becoming bodiless. It shouldn’t be difficult to do this. Consider yourselves to be incorporeal souls and remember the Father. Song: Salutations to Shiva. Essence for dharna: 1. Become a Raj Rishi and do tapasya. In order to enter the rosary that is worthy of worship, do service the same as the father. Become a firm yogi. 2. Knowledge is very entertaining. Therefore, study in an entertaining way and don’t become confused. Blessing: May you be a spinner of the discus of self-realisation and know the horoscope of 5000 years by becoming master knowledge-full. Those who become spinners of the discus of self-realisation at this time claim the right to become rulers of the globe in the future kingdom. A spinner of the discus of self-realisation means one who knows all their different parts in the whole cycle. Particularly now, at this time, children know their horoscopes of 5000 years and have become master knowledge-full. Everyone now knows the special point of making your life like a diamond in this last birth and thereby becoming one who plays a hero part throughout the whole cycle. Slogan: Colour your companions with the Father’s company and you will not be coloured by their company.

Thursday, October 24, 2013


Essence: Sweet children, from being worshippers you are now becoming worthy of worship. From being beggar you are 
becoming princes. Therefore, you should be dancing and jumping with joy. You should never cry. 

Question: In order to make Bharat wealthy, in what aspect does the Father make you equal to Himself by showering the 
imperishable jewels of knowledge on you? 
Answer: Baba says: Children, just as I am Rup Basant, so I also make you rup basant. Imbibe the imperishable jewels of 
knowledge you have received and donate them through your mouths. It is by your making this great donation that Bharat will 
become wealthy. Just as you are claiming your inheritance from the Father, enable others to receive it in the same way. It 
is your duty to show the path to everyone and become those who bestow happiness. 

Song: On the path of justice. 

Essence for dharna: 

1. In order to sit on the Father’s heart-throne, take responsibility for service. You definitely have to become great donors. 
There is no harm if some expense is incurred in donating knowledge. 

2. This is a very steep ascent and you must therefore be very cautious. Continue to take shrimat at every step. 

Blessing: May you be a jewel on the forehead and constantly keep the awareness of the Father emerged in your forehead. 

A jewel on the forehead means constantly to have remembrance of the Father on your forehead. This is known as an elevated stage. 
Constantly consider yourself to be an elevated soul and continue to move forward by remaining stable in an elevated stage. Those 
who remain in this elevated stage are easily able to overcome the many situations down below. The problems remain down below 
and they themselves go up above. The position of the jewel on the forehead is high on the forehead and this is why you mustn’t 
come down, but always remain up above. 

Slogan: In order to experience the stage of a carefree emperor, transform “mine” into “Yours”. 


मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - तुम अभी पुजारी से पूज्य, बेगर से प्रिन्स बन रहे हो, 
इसलिए तुम्हें खुशी में खग्गियां मारनी है, कभी भी रोना नहीं है'' 

प्रश्न:- अविनाशी ज्ञान रत्नों की वर्षा से भारत को साहूकार बनाने के लिए बाप 
तुम्हें किस बात में आप समान बनाते हैं? 
उत्तर:- बाबा कहते - बच्चे, जैसे मैं रूप बसन्त हूँ, ऐसे तुम्हें भी रूप बसन्त बनाता 
हूँ। जो अविनाशी ज्ञान रत्न तुम्हें मिले हैं उन्हें धारण कर मुख से दान करो। इसी 
महादान से भारत साहूकार बनेगा। जैसे तुम बच्चे बाप से वर्सा ले रहे हो ऐसे औरों 
को भी दो। तुम्हारा फर्ज है सबको रास्ता बताना, सुखदाई बनना। 

गीत:- इन्साफ की डगर पर....... 

धारणा के लिए मुख्य सार:- 

1) बाप के दिलतख्त पर बैठने के लिए सर्विस की जवाबदारी लेनी है। महादानी 
जरूर बनना है। ज्ञान दान करने में कुछ खर्चा हो तो हर्जा नहीं। 

2) ऊंची चढ़ाई है इसलिए बहुत सावधानी से चलना है। कदम-कदम पर श्रीमत लेते रहना है। 

वरदान:- अपने मस्तक बीच सदा बाप की स्मृति इमर्ज रखने वाले मस्तकमणि भव 

मस्तकमणि अर्थात् जिसके मस्तक में सदा बाप की याद रहे, इसी को ही ऊंची स्टेज 
कहा जाता है। अपने को सदा ऐसी ऊंची स्टेज पर स्थित रहने वाली श्रेष्ठ आत्मा समझ 
आगे बढ़ते रहो। जो इस ऊंची स्टेज पर रहते हैं वह नीचे की अनेक प्रकार की बातों को
सहज पार कर लेते हैं। समस्यायें नीचे रह जाती हैं और स्वयं ऊपर हो जाते। मस्तकमणि 
का स्थान ही ऊंचा मस्तक है इसलिए नीचे नहीं आना, सदा ऊपर रहो। 

स्लोगन:- बेफिक्र बादशाह की स्थिति का अनुभव करना है तो मेरे को तेरे में परिवर्तन कर दो। 


मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - ज्ञान का सुख 21 पीढ़ी चलता है, वह है स्वर्ग का सदा सुख, 
भक्ति में तीव्र भक्ति से अल्पकाल क्षण भंगुर सुख मिलता है'' 

प्रश्न:- किस श्रीमत पर चलकर तुम बच्चे सद्गति को प्राप्त कर सकते हो? 
उत्तर:- बाप की तुम्हें श्रीमत है - इस पुरानी दुनिया को भूल एक मुझे याद करो। इसी को 
ही बलिहार जाना अथवा जीते जी मरना कहा जाता है। इसी श्रीमत से तुम श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ 
बनते हो। तुम्हारी सद्गति हो जाती है। साकार मनुष्य, मनुष्य की सद्गति नहीं कर सकते। 
बाप ही सबका सद्गति दाता है। 

गीत:- ओम् नमो शिवाए........ 

धारणा के लिए मुख्य सार:- 

1) बाप पर पूरा बलिहार जाना है। देह का अहंकार छोड़ योग अग्नि से विकर्म विनाश करने हैं। 

2) एम ऑब्जेक्ट को बुद्धि में रखकर पढ़ाई करनी है। बने बनाये ड्रामा को बुद्धि में रखकर 
स्वदर्शन चक्रधारी बनना है। 

वरदान:- मेरे को तेरे में परिवर्तन कर सदा हल्का रहने वाले डबल लाइट फरिश्ता भव 

चलते-फिरते सदा यही स्मृति में रहे कि हम हैं ही फरिश्ते। फरिश्तों का स्वरूप क्या, बोल 
क्या, कर्म क्या... वह सदा स्मृति में रहें क्योंकि जब बाप के बन गये, सब कुछ मेरा सो 
तेरा कर दिया तो हल्के (फरिश्ते) बन गये। इस लक्ष्य को सदा सम्पन्न करने के लिए एक 
ही शब्द याद रहे - सब बाप का है, मेरा कुछ नहीं। जहाँ मेरा आये वहाँ तेरा कह दो, फिर 
कोई बोझ फील नहीं होगा, सदा उड़ती कला में उड़ते रहेंगे। 

स्लोगन:- बाप के ऊपर बलिहार जाने का हार पहन लो तो माया से हार नहीं होगी। 


Essence: Sweet children, the happiness of knowledge continues for 21 generations. That is the constant happiness of heaven. 
On the path of devotion, when they do intense devotion, they receive momentary happiness. 

Question: By following which shrimat can you children attain salvation?
Answer: The Father’s shrimat is: Forget this old world and remember Me alone. This is known as surrendering yourself or 
dying alive. By following this shrimat, you become the most elevated of all. You then receive salvation. Corporeal human 
beings cannot grant salvation to human beings. The Father alone is the Bestower of Salvation for all. 

Song: Salutations to Shiva. 

Blessing: May you be a double-light angel who transforms “mine” into “Yours” and always remains light. 

While walking and moving around, always keep in your awareness that you are angels. Always keep in your awareness what 
the form of angels is and what their words and actions are because, when you belong to the Father, you make everything that 
belongs to you belong to the Father and so you become light (angels). In order to fulfil this aim, just constantly remember the 
one expression: “Everything belongs to the Father, nothing is mine”. Whenever you use the word “mine”, make it into “Yours” 
and you won’t feel any burden and will constantly fly in the flying stage. 

Slogan: Wear the garland of being surrendered to the Father and you will not be defeated by Maya. 


मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - आज्ञाकारी बनो, बाप की पहली आज्ञा है - अपने को 
आत्मा समझ बाप को याद करो'' 

प्रश्न:- आत्मा रूपी बर्तन अशुद्ध क्यों हुआ है? उसको शुद्ध बनाने का साधन क्या है? 
उत्तर:- वाह्यात बातों को सुनते और सुनाते आत्मा रूपी बर्तन अशुद्ध बन गया है। 
इसको शुद्ध बनाने के लिए बाप का फ़रमान है हियर नो ईविल, सी नो ईविल........ 
एक बाप से सुनो, बाप को ही याद करो तो आत्मा रूपी बर्तन शुद्ध हो जायेगा। 
आत्मा और शरीर दोनों पावन बन जायेंगे। 

गीत:- जो पिया के साथ है....... 

धारणा के लिए मुख्य सार:- 

1) हर बात में विजय का आधार निश्चय है इसलिए निश्चयबुद्धि जरूर बनना है। 
सद्गति दाता बाप में कभी संशय नहीं उठाना है। 

2) बुद्धि को पवित्र वा शुद्ध बनाने के लिए अशरीरी बनने का अभ्यास करना है। 
वाह्यात (व्यर्थ) बातें न सुननी है, न सुनानी है। 

वरदान:- एक बाबा शब्द की स्मृति द्वारा कमजोरी शब्द को समाप्त करने वाले सदा समर्थ आत्मा भव 

जिस समय कोई कमजोरी वर्णन करते हो, चाहे संकल्प की, बोल की, चाहे संस्कार-स्वभाव 
की तो यही कहते हो कि मेरा विचार ऐसे कहता है, मेरा संस्कार ही ऐसा है। लेकिन जो बाप 
का संस्कार, संकल्प सो मेरा। समर्थ की निशानी ही है बाप समान। तो संकल्प, बोल, हर 
बात में बाबा शब्द नेचुरल हो और कर्म करते करावनहार की स्मृति हो तो बाबा के आगे 
माया अर्थात् कमजोरी आ नहीं सकती। 

स्लोगन:- जिसके पास गम्भीरता की विशेषता है, उन्हें हर कार्य में स्वत: सिद्धि प्राप्त होती है। 


Essence: Sweet children, become obedient. The Father’s first order is: Consider yourself to be a soul and remember the Father. 

Question: Why has the vessel of the soul become unclean? What is the method to cleanse it?
Answer: The vessel of the soul has become unclean by listening to and speaking of wasteful matters. In order to cleanse it, the 
Father’s orders are: Hear no evil! See no evil! Listen to the one Father. Only remember the one Father and the vessel of the soul 
will become clean. Both the soul and the body will become pure. 

Song: There are showers of rain on those who are with the Beloved….

Essence for dharna: 

1. In every aspect, the basis of victory is faith. Therefore, become those with faith in the  
intellect. Never doubt the Father, 
the Bestower of Salvation. 

2. In order to purify and cleanse your intellect, practise becoming bodiless. Do not speak of or listen to wasteful things.

Blessing: May you finish the word ‘weakness’ with the awareness of the one word ‘Baba’ and become a constantly powerful soul. 

Whenever you speak of any weakness, whether it is of your thoughts, words, nature or sanskars, you say, “This is what I think. My 
sanskars are like that.” However, whatever the Father’s sanskars and thoughts are they are ‘mine’. The sign of being powerful is 
in being equal to the Father. The word ‘Baba’ should naturally be in your every thought, word and situation. While performing 
actions, there should be the awareness of Karavanhar (One who inspires) because Maya, that is, weakness, is not able to come 
in front of Baba. 

Slogan: Those who have the speciality of maturity receive success in every task automatically.