Saturday, November 1, 2014

Murli-1/11/2014-English

1st November 2014  ________________________ Essence: Sweet children, keep an eye on yourself fully. You should not do anything against the law. By disobeying shrimat you will fall. Question: What precautions must you take in order to become a multimillionaire? Answer: Let there always be this attention: Whatever I do, others who see me will do the same. You should not have any false arrogance. You should never miss the murli. Be careful about your thoughts, words and deeds; your eyes should not deceive you. You will then be able to accumulate an income of multimillions. To achieve this, remain introverted and remember the Father and remain safe from all sinful actions. Essence for Dharna: 1. You must perform every action according to the Father's instructions. You must never disobey shrimat. Only then will all your desires be fulfilled without your asking for anything. You must not have anis knowledge? Blessing: May you be an intense effort-maker who flies in the flying stage with the wings of courage, zeal and enthusiasm. The flying stage has two wings - courage and zeal and enthusiasm. In order to achieve success in any task, it is absolutely essential to have courage and zeal and enthusiasm. Where there is no zeal or enthusiasm, there is tiredness and those who are tired can never be successful. According to the present time, you cannot reach your destination without the flying stage because the effort is for one birth whereas the attainment is not just for 21 births, but for the whole cycle. When you have the recognition of time in your awareness, your efforts automatically become intense. Slogan: Only those who fulfil everyone’s desires of the mind are Kaamdhenu. OM SHANTI ____________________________

Murli-1/11/2014-Hindi

01-11-14        प्रातः मुरली       ओम् शान्ति       “बापदादा”        मधुबन   मीठे बच्चे - “अपने ऊपर पूरी नजर रखो, कोई भी बेकायदे चलन नहीं चलना, श्रीमत का उल्लंघन करने से गिर जायेंगे " प्रश्न:-    पद्मापद्मपति बनने के लिए कौन-सी खबरदारी चाहिए? उत्तर:- सदैव ध्यान रहे - जैसा कर्म हम करेंगे हमें देख और भी करने लगेंगे । किसी भी बात का मिथ्या अहंकार न आये । मुरली कभी भी मिस न हो । मन्सा-वाचा-कर्मणा अपनी सम्भाल रखो । यह आँखें धोखा न दें तो पद्मों की कमाई जमा कर सकेंगे । इसके लिए अन्तर्मुखी होकर बाप को याद करो और विकर्मों से बचे रहो । ओम् शान्ति | रूहानी बच्चों को बाप ने समझाया है, यहाँ तुम बच्चों को इस ख्याल से जरूर बैठना होता है, यह बाबा भी है, टीचर और सतगुरू भी है । और यह भी महसूस करते हो-बाबा को याद करते-करते पवित्र बन, पवित्रधाम में जाकर पहुँचेंगे । बाप ने समझाया है कि पवित्रधाम से ही तुम नीचे उतरते हो । उसका नाम ही है पवित्रधाम । सतोप्रधान से फिर सतो, रजो, तमो..... अभी तुम समझते हो कि हम नीचे गिरे हुए हैं अर्थात् वेश्यालय में हैं । भल तुम संगमयुग पर हो, परन्तु ज्ञान से तुम जानते हो कि हमने किनारा किया हुआ है फिर भी अगर हम शिवबाबा की याद में रहते हैं तो शिवालय दूर नहीं । शिवबाबा को याद नहीं करते तो शिवालय बहुत दूर है । सजायें खानी पड़ती हैं तो बहुत दूर हो जाता है । तो बाप बच्चों को कोई जास्ती तकलीफ नहीं देते हैं । एक तो बार-बार कहते हैं मन्सा-वाचा-कर्मणा पवित्र बनना है । यह आँख भी बड़ा धोखा देती हैं, इनसे बहुत सम्भालकर चलना होता है । बाप ने समझाया है कि ध्यान और योग बिल्कुल अलग है । योग अर्थात् याद । आँखें खुली होते भी तुम याद कर सकते हो । ध्यान को कोई योग नहीं कहा जाता । भोग भी ले जाते हैं तो डायरेक्शन अनुसार ही जाना है । इसमें माया भी बहुत आती है । माया ऐसी है जो एकदम नाक में दम कर देती है । जैसे बाप बलवान है, वैसे माया भी बड़ी बलवान है । इतनी बलवान है जो सारी दुनिया को वेश्यालय में धकेल दिया है इसलिए इसमें बहुत खबरदारी रखनी होती है । बाप की कायदे अनुसार याद चाहिए । बेकायदे कोई काम किया तो एकदम गिरा देती है । ध्यान आदि की कभी कोई इच्छा नहीं रखनी है । इच्छा मात्रम् अविद्या बाप तुम्हारी सब मनोकामनायें बिगर मांगे पूरी कर देते हैं, अगर बाप की आज्ञा पर चले तो । अगर बाप की आज्ञा न मान उल्टा रास्ता लिया तो हो सकता है स्वर्ग के बदले नर्क में ही गिर जाएं । गायन भी है गज को ग्राह ने खाया । बहुतों को ज्ञान देने वाले, भोग लगाने वाले आज हैं कहाँ, क्योंकि बेकायदे चलन के कारण पूरे मायावी बन जाते हैं । डीटी बनते-बनते डेविल बन जाते हैं । बाप जानतेहैं कि बहुत अच्छे पुरुषार्थी जो देवता बनने वाले थे वह असुर बन असुरों के साथ रहते हैं । ट्रेटर हो जाते हैं । बाप का बनकर फिर माया के बन जाते, उन्हें ट्रेटर कहा जाता है । अपने ऊपर नजर रखनी होती है । श्रीमत का उल्लंघन किया तो यह गिरे । पता भी नहीं पडेगा । बाप तो बच्चों को सावधान करते हैं कि कोई ऐसी चलन न चलो जो रसातल में पहुँच जाओ । कल भी बाबा ने समझाया - बहुत गोप हैं आपस में कमेटियाँ आदि बनाते हैं, जो कुछ करते हैं, श्रीमत के आधार बिगर करते हैं तो डिस सर्विस करते हैं । बिगर श्रीमत करेंगे तो गिरते ही जायेंगे । बाबा ने शुरू में कमेटी बनाई थी तो माताओं की बनाई थी क्योंकि कलष तो माताओं को ही मिलता है । वन्दे मातरम् गाया हुआ है ना । अगर गोप लोग कमेटी बनाते हैं तो वन्दे गोप तो गायन नहीं है । श्रीमत पर नहीं तो माया के जाल में फँस पड़ते हैं । बाबा ने माताओं की कमेटी बनाई, उन्हों के हवाले सब कुछ कर दिया । पुरुष अक्सर करके देवाला मारते है, स्त्रियाँ नहीं । तो बाप भी कलष माताओं पर रखते हैं । इस ज्ञान मार्ग में मातायें भी देवाला मार सकती हैं । पद्मापद्म भाग्यशाली जो बनने वाले हैं, वह माया से हार खाकर देवाला मार सकते हैं । इसमें स्री-पुरुष दोनों देवाला मार सकते हैं और मारते भी हैं । कितने हार खाकर चले गये गोया देवाला मार दिया ना । बाप समझाते हैं भारतवासियो ने तो पूरा देवाला मारा है । माया कितनी जबरदस्त है । जो समझ नहीं सकते हैं हम क्या थे, कहाँ से एकदम नीचे आकर गिरे हैं । यहाँ भी ऊच चढ़ते-चढ़ते फिर श्रीमत को भूल अपनी मत पर चलते है तो देवाला मार देते है । वो लोग तो देवाला मारते फिर 5-7 वर्ष बाद खड़े हो जाते है । यहाँ तो 84 जन्मों का देवाला मारते है । ऊँच पद पा न सके । देवाला मारते ही रहते हैं । बाबा के पास फोटो होता तो बतलाते । तुम कहो बाबा तो बिल्कुल ठीक कहते हैं । यह कितना बडा महारथी था, बहुतों को उठाते थे । आज है नहीं । देवाले में हैं । बाबा घड़ी-घड़ी बच्चों को सावधान करते रहते हैं । अपनी मत पर कमेटियाँ आदि बनाना इसमें कुछ रखा नहीं है । आपस में मिलकर झरमुई-झगमुई करना, यह ऐसा करता था, फलाना ऐसा करता था... सारा दिन यही करते रहते हैं । बाप से बुद्धियोग लगाने से ही सतोप्रधान बनेंगे । बाप का बने और बाप से योग नहीं तो घड़ी-घड़ी गिरते रहेंगे । कनेक्शन ही टूट पडता है । लिंक टूट जाए तो घबराना नहीं चाहिए । माया हमें इतना तंग क्यों करती है । कोशिश कर बाप के साथ लिंक जोडनी चाहिए । नहीं तो बैटरी चार्ज कैसे होगी । विकर्म होने से बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है । शुरू में कितने ढेर के ढेर बाबा के आकर बने । भट्ठी में आये फिर आज कहाँ हैं । गिर पड़े क्योंकि पुरानी दुनिया याद आई । अभी बाप कहते हैं मैं तुमको बेहद का वैराग्य दिलाता हूँ, इस पुरानी दुनिया से दिल नहीं लगाओ । दिल स्वर्ग से लगानी है । अगर ऐसा लक्ष्मी-नारायण बनना है तो मेहनत करनी पड़े । बुद्धियोग एक बाप के साथ होना चाहिए । पुरानी दुनिया से वैराग्य । सुखधाम और शान्तिधाम को याद करो । जितना हो सके उठते, बैठते, चलते, फिरते बाप को याद करो । यह तो बिल्कुल ही सहज है । तुम यहाँ आये ही हो नर से नारायण बनने के लिए । सबको कहना है कि अब तमोप्रधान से सतोप्रधान बनना है क्योंकि रिटर्न जर्नी होती है । वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी रिपीट माना नर्क से स्वर्ग, फिर स्वर्ग से नर्क । यह चक्र फिरता ही रहता है । बाप ने कहा है यहाँ स्वदर्शन चक्रधारी होकर बैठो । इसी याद में रहो कि हमने कितने बार चक्र लगाया है । अभी फिर से हम देवता बन रहे हैं । दुनिया में कोई भी इस राज़ को नहीं समझते हैं । यह ज्ञान देवताओं को है नहीं । वह तो हैं ही पवित्र । उनमें ज्ञान ही नहीं जो शंख बजावें । वह पवित्र हैं, उनको यह निशानी देने की दरकार नहीं । निशानी तब होती है जब दोनों इकट्ठे होते हैं । तुमको भी निशानी नहीं क्योंकि तुम आज देवता बनते-बनते कल असुर बन जाते हो । बाप देवता बनाते, माया असुर बना देती है । बाप जब समझाते हैं तब पता पड़ता है कि सचमुच हमारी अवस्था गिरी हुई है । कितने बिचारे शिवबाबा के खजाने में जमा कराते फिर मांगकर असुर बन जाते । इसमें योग की ही सारी कमी है । योग से ही पवित्र बनना है । बुलाते भी हो बाबा आओ, हमें पतित से पावन बनाओ, जो हम स्वर्ग में जा सके । याद की यात्रा है ही पावन बन ऊँच पद पाने के लिए, परन्तु कई चलते-चलते मर जाते हैं, फिर भी जो कुछ सुना है तो शिवालय में आयेंगे जरूर । पद भल कैसा भी पायें । एक बार याद किया तो स्वर्ग में आयेंगे जरूर । बाकी ऊंच पद पा न सकें । स्वर्ग का नाम सुनकर खुश होना चाहिए । फेल हो पाई-पैसे का पद पा लिया, इसमें खुश नहीं हो जाना है । फीलिंग तो आती है ना-मैं नौकर हूँ । पिछाड़ी में तुम्हें सब साक्षात्कार होंगे कि हम क्या बनेंगे, हमसे क्या विकर्म हुआ है, जो ऐसी हालत हुई है । मैं महारानी क्यों नहीं बनूँ । कदम-कदम पर खबरदारी से चलने से तुम पद्मापद्मपति बन सकते हो । मन्दिरों में देवताओं को पद्म की निशानी दिखाते है । दर्जे में फर्क हो जाता है । आज की राजाई का कितना दबदबा रहता है! है तो अल्पकाल का । सदाकाल के राजा तो बन न सके । तो अभी बाप कहते हैं-तुम्हें लक्ष्मी-नारायण बनना है तो पुरुषार्थ भी ऐसा चाहिए । कितना हम औरों का कल्याण करते हैं? अन्तर्मुख हो कितना समय बाबा की याद में रहते हैं? अभी हम जा रहे हैं अपने स्वीट होम में। फिर आयेंगे सुखधाम में। यह सब ज्ञान का मन्थन अन्दर में चलता रहे । बाप में ज्ञान और योग दोनों हैं । तुम्हारे में भी होना चाहिए । जानते हो हमें शिवबाबा पढ़ाते हैं तो ज्ञान भी हुआ और याद भी हुई । ज्ञान और योग दोनों साथ-साथ चलता है । ऐसे नही, योग में बैठो, बाबा को याद करते रहो और नॉलेज भूल जाए । बाप योग सिखलाते हैं तो नॉलेज भूल जाते हैं क्या? सारी नॉलेज उनमें रहती है । तुम बच्चों में भी नॉलेज होनी चाहिए । पढ़ना चाहिए । जैसे कर्म मैं करुँगा मुझे देख और भी करेंगे । मैं मुरली नहीं पढूँगा तो और भी नहीं पढ़ेंगे । मिथ्या अहंकार आ जाता है तो माया झट वार कर देती है । कदम- कदम बाप से श्रीमत लेते रहना है । नहीं तो कुछ न कुछ विकर्म बन जाते है । बहुत बच्चे भूलें करते बाप को नहीं बताते तो अपनी सत्यानाश कर लेते हैं । गफलत होने से माया थप्पड़ लगा देती है । वर्थ नाट ए पेनी बना देती है । अहंकार में आने से माया बहुत विकर्म कराती है । बाबा ने ऐसे थोड़ेही कहा है, ऐसी-ऐसी पुरुषों की कमेटियाँ बनाओ । कमेटी में एक-दो समझू सयानी बच्चियाँ जरूर होनी चाहिए । जिनकी ही राय पर काम हो । कलष तो लक्ष्मी पर रखा जाता है ना । गायन भी है, अमृत पिलाते थे फिर कहाँ यज्ञ में विघ्न डालते थे । अनेक प्रकार के विघ्न डालने वाले है । सारा दिन यही झरमुई-झगमुई की बातें करते रहते हैं । यह बहुत खराब है । कोई भी बात हो तो बाप को रिपोर्ट करनी चाहिए । सुधारने वाला तो एक ही बाप है । तुम अपने हाथ में लॉ नहीं उठाओ । तुम बाप की याद में रहो । सभी को बाप का परिचय देते रहो तब ऐसा बन सकेंगे । माया बहुत कड़ी है । किसको नहीं छोड़ती । सदैव बाप को समाचार लिखना चाहिए । डायरेक्शन लेते रहना चाहिए । यूँ तो डायरेक्शन सदैव मिलते रहते हैं । ऐसे तो बच्चे समझते हैं बाबा ने तो आपेही इस बात पर समझा दिया, बाबा तो अन्तर्यामी है । बाबा कहते नही, मैं तो नॉलेज पढ़ाता हूँ । इसमें अन्तर्यामी की बात ही नहीं । हाँ, यह जानता हूँ कि यह सब मेरे बच्चे हैं । हर एक शरीर के अन्दर मेरे बच्चे हैं । बाकी ऐसे नहीं कि बाप सभी के अन्दर विराजमान है । मनुष्य तो उल्टा ही समझ लेते है । बाप कहते हैं मैं जानता हूँ कि सभी तख्त पर आत्मा विराजमान हैं । यह तो कितनी सहज बात है । सभी चैतन्य आत्मायें अपने- अपने तख्त पर बैठी हैं फिर भी परमात्मा को सर्वव्यापी कह देते हैं, यह है एकज भूल । इस कारण ही भारत इतना गिरा हुआ है । बाप कहते हैं तुमने मेरी बहुत ग्लानि की है । विश्व के मालिक बनाने वाले को तुमने गाली दी है इसलिए बाप कहते हैं यदा यदाहि... । बाहर वाले यह सर्वव्यापी का ज्ञान भारतवासियों से सीखते हैं । जैसे भारतवासी उनसे हुनर सीखते हैं वह फिर उल्टा सीखते हैं । तुम्हें तो एक बाप को याद करना है और बाप का परिचय भी सबको देना है । तुम हो अन्धों की लाठी । लाठी से राह बतलाते है ना । अच्छा! मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग । रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते ।   धारणा के लिए मुख्य सार: 1. बाप की आज्ञा अनुसार हर कार्य करना है । कभी भी श्रीमत का उल्लंघन न हो तब ही सर्व मनोकामनायें बिना मांगे पूरी होंगी । ध्यान दीदार की इच्छा नहीं रखनी है, इच्छा मात्रम् अविद्या बनना है । 2. आपस में मिलकर झरमुई-झगमुई (एक-दूसरे का परचितन) नहीं करना है । अन्तर्मुख हो अपनी जांच करनी है कि हम बाबा की याद में कितना समय रहते हैं, ज्ञान का मंथन अन्दर चलता है?   वरदान:- हिम्मत और उमंग-उत्साह के पंखों से उड़ती कला में उड़ने वाले तीव्र पुरुषार्थी भव !   उड़ती कला के दो पंख हैं - हिम्मत और उमंग-उत्साह । किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है । जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता । वर्तमान समय के अनुसार उड़ती कला के सिवाए मंज़िल पर पहुँच नहीं सकते क्योंकि पुरुषार्थ एक जन्म का और प्राप्ति 21 जन्म के लिए ही नहीं सारे कल्प की है । तो जब समय की पहचान स्मृति में रहती है तो पुरुषार्थ स्वत: तीव्रगति का हो जाता है ।  स्लोगन:-  सर्व की मनोकामनायें पूर्ण करने वाले ही कामधेनु है |  ओम् शान्ति |  x

Friday, October 31, 2014

Murli-31/10/2014-English

Essence: Sweet children, by receiving one glance from the Father, human beings of the whole world can go beyond. 
This is why it is said that the soul goes beyond with a glance.

Question: Why should drums of happiness beat in the hearts of you children?
Answer: Because you know that Baba has come to take everyone back with Him. We are now to return home with 
our Father. After the cries of distress, there will be cries of victory. By receiving one glance from the Father, the 
whole world will receive the inheritance of liberation and liberation-in-life. The whole world will go beyond.

Essence for dharna: 

1. With the power of yoga, establish the world of limitless happiness. Forget this old world of sorrow. Let there be the 
happiness that we are becoming the masters of the land of truth. 

2. Check yourself every day: Did any vice cause any distress throughout the day? Did I perform any devilish acts? 
Did I come under the influence of greed?

Blessing: May you be a specially beloved prince of the present and so the future by receiving God’s loving affection.

At the confluence age, it is only you fortunate children who become worthy of receiving the loving affection from the 
Comforter of Hearts. It is only a handful out of multimillion souls who receive this loving affection from God. Through 
this divine affection, you become the specially beloved princes. “Raj dulare” (beloved prince) means to be a king now 
and also a king in the future. Even before the future, you claim a right to self-sovereignty at this time. Just as the praise 
of the future kingdom is one kingdom, one religion, … similarly, each soul has a united rule over all the physical senses.

Slogan: Only those who show the Father’s character through their own faces are loving to God.

Thursday, October 30, 2014

Murli-31/10/2014-Hindi

31-10-14        प्रातः मुरली       ओम् शान्ति       “बापदादा”        मधुबन   मीठे बच्चे - “बाप की एक नजर मिलने से सारे विश्व के मनुष्य-मात्र निहाल हो जाते हैं, इसलिए कहा जाता है नज़र से निहाल..... ''  प्रश्न:-    तुम बच्चों की दिल में खुशी के नगाड़े बजने चाहिए - क्यों? उत्तर:- क्योंकि तुम जानते हो - बाबा आया है सबको साथ ले जाने । अब हम अपने बाप के साथ घर जायेंगे । हाहाकार के बाद जयजयकार होने वाली है । बाप की एक नजर से सारे विश्व को मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा मिलने वाला है । सारी विश्व निहाल हो जायेगी । ओम् शान्ति | रूहानी शिवबाबा बैठ अपने रूहानी बच्चों को समझाते है । यह तो जानते हो कि तीसरा नेत्र भी होता है । बाप जानते हैं सारी दुनिया की जो भी आत्मायें हैं, सबको मैं वर्सा देने आया हूँ । बाप की दिल में तो वर्सा ही याद होगा । लौकिक बाप की भी दिल में वर्सा ही याद होगा । बच्चों को वर्सा देंगे । बच्चा नहीं होता है तो मूँझते है, किसको दे । फिर एडाप्ट कर लेते हैं । यहाँ तो बाप बैठे हैं, इनकी तो सारे दुनिया की जो भी आत्मायें हैं, सब तरफ नजर जाती है । जानते हैं सबको मुझे वर्सा देना है । भल बैठे यहाँ हैं परन्तु नजर सारे विश्व पर और सारे विश्व के मनुष्य मात्र पर है क्योंकि सारे विश्व को ही निहाल करना होता है । बाप समझाते हैं यह है पुरूषोत्तम संगमयुग । तुम जानते हो बाबा आया हुआ है सबको शान्तिधाम, सुखधाम ले जाने । सब निहाल हो जाने वाले हैं । ड़ामा के प्लैन अनुसार कल्प-कल्प निहाल हो जायेंगे । बाप सब बच्चों को याद करते हैं । नज़र तो जाती है ना । सब नहीं पढ़ेंगे । ड्रामा प्लैन अनुसार सबको वापिस जाना है क्योंकि नाटक पूरा होता है । थोड़ा आगे चलेंगे तो खुद भी समझ जायेंगे अब विनाश होता है । अब नई दुनिया की स्थापना होनी है क्योंकि आत्मा तो फिर भी चैतन्य है ना । तो बुद्धि में आ जायेगा - बाप आया हुआ है । पैराडाइज स्थापन होगा और हम शान्तिधाम में चले जायेंगे । सबकी गति होगी ना । बाकी तुम्हारी सद्गति होगी । अभी बाबा आया हुआ है । हम स्वर्ग में जायेंगे । जयजयकार हो जायेगी । अभी तो बहुत हाहाकार है । कहाँ अकाल पड़ रहा है, कहाँ लड़ाई चल रही है, कहाँ भूकम्प होते हैं । हजारों मरते रहते हैं । मौत तो होना ही है । सतयुग में यह बातें होती नहीं । बाप जानते हैं अब मैं जाता हूँ फिर सारे विश्व में जयजयकार हो जायेगी । मैं भारत में ही जाऊँगा । सारे विश्व में भारत जैसे गाँव है । बाबा के लिए तो गाँव ठहरा । बहुत थोडे मनुष्य होंगे । सतयुग में सारी विश्व जैसे एक छोटा गाँव था । अभी तो कितनी वृद्धि हो गई है । बाप की बुद्धि में तो सब है ना । अब इस शरीर द्वारा बच्चों को समझा रहे हैं । तुम्हारा पुरूषार्थ वही चलता है जो कल्प-कल्प चलता है । बाप भी कल्प वृक्ष का बीजरूप है । यह है कारपोरियल झाड़ । ऊपर में है इनकारपोरियल झाड़ । तुम जानते हो यह कैसे बना हुआ है । यह समझ और कोई मनुष्य में नहीं है । बेसमझ और समझदारों का फर्क देखो । कहाँ समझदार स्वर्ग में राज्य करते थे, उनको कहा ही जाता है सचखण्ड, हेविन । अभी तुम बच्चों को अन्दर में बड़ी खुशी होनी चाहिए । बाबा आया हुआ है, यह पुरानी दुनिया तो जरूर बदलेगी । जितना-जितना जो पुरूषार्थ करेंगे, उतना पद पायेंगे । बाप तो पढ़ा रहे हैं । यह तुम्हारी स्कूल तो बहुत वृद्धि को पाती रहेगी । बहुत हो जायेंगे । सबका स्कूल इकट्ठा थोड़ेही होगा । इतने रहेगे कहाँ? तुम बच्चों को याद है- अभी हम जाते हैं सुखधाम । जैसे कोई भी विलायत में जाते है तो 8-10 वर्ष जाकर रहते है ना । फिर आते हैं भारत में । भारत तो गरीब है । विलायत वालों को यहाँ सुख नहीं आयेगा । वैसे तुम बच्चों को भी यहाँ सुख नहीं है । तुम जानते हो हम बहुत ऊँची पढ़ाई पढ़ रहे हैं, जिससे हम स्वर्ग के मालिक देवता बनते है । वहाँ कितने सुख होंगे । उस सुख को सभी याद करते है । यह गाँव (कलियुग) तो याद भी नहीं आ सकता, इनमें तो अथाह दु :ख हैं । इस रावण राज्य, पतित दुनिया में आज अपरमअपार दुःख है कल फिर अपरमअपार सुख होंगे । हम योगबल से अथाह सुख वाली दुनिया स्थापन कर रहे हैं । यह राजयोग है ना । बाप खुद कहते हैं मैं तुमको राजाओं का राजा बनाता हूँ । तो ऐसा बनाने वाले टीचर को याद करना चाहिए ना । टीचर बिगर बैरिस्टर, इंजीनियर आदि थोड़ेही बन सकते हैं । यह फिर है नई बात । आत्माओं को योग लगाना है परमात्मा बाप के साथ, जिससे ही बहुत समय अलग रहे हैं । बहुकाल क्या? वह भी बाप आपेही समझाते रहते हैं । मनुष्य तो लाखों वर्ष आयु कह देते हैं । बाप कहते हैं-नहीं, यह तो हर 5 हजार वर्ष बाद तुम जो पहले-पहले बिछुड़े हो वही आकर बाप से मिलते हो । तुमको ही पुरूषार्थ करना है । मीठे-मीठे बच्चों को कोई तकलीफ नहीं देते हैं, सिर्फ कहते हैं अपने को आत्मा समझो । जीव आत्मा है ना । आत्मा अविनाशी है, जीव विनाशी है । आत्मा एक शरीर छोड़ दूसरा लेती है, आत्मा कभी पुरानी नहीं होती है । वन्डर है ना । पढ़ाने वाला भी वन्डरफुल, पढ़ाई भी वन्डरफुल है । किसको भी याद नहीं, भूल जाती है । आगे जन्म में क्या पढ़ते थे, किसको याद है क्या? इस जन्म में तुम पढते हो, रिजल्ट नई दुनिया में मिलती है । यह सिर्फ तुम बच्चों को पता है । यह याद रहना चाहिए- अभी यह पुरूषोत्तम संगमयुग है, हम नई दुनिया में जाने वाले हैं । यह याद रहे तो भी तुमको बाप की याद रहेगी । याद के लिए बाप अनेक उपाय बताते हैं । बाप भी है, टीचर भी है, सतगुरू भी है । तीनों रूप में याद करो । कितनी युक्तियाँ दे रहे हैं याद करने की । परन्तु माया भुला देती है । बाप जो नई दुनिया स्थापन करते हैं, बाप ने ही बताया है यह पुरूषोत्तम संगमयुग है, यह याद करो फिर भी याद क्यों नहीं कर सकते हो! युक्तियाँ बतलाते हैं याद की । फिर साथ-साथ कहते भी हैं माया बड़ी दुश्तर है । घडी-घड़ी तुमको भुलायेगी और देह- अभिमानी बना देगी इसलिए जितना हो सके याद करते रहो । उठते-बैठते, चलते-फिरते देह के बदले अपने को देही समझो । यह है मेहनत । नॉलेज तो बहुत सहज है । सब बच्चे कहते हैं याद ठहरती नहीं । तुम बाप को याद करते हो, माया फिर अपनी तरफ खीँच लेती है । इस पर ही यह खेल बना हुआ है । तुम भी समझते हो हमारा बुद्धियोग जो बाप के साथ और पढाई की सबजेक्ट में होना चाहिए, वह नहीं है, भूल जाते हैं । परन्तु तुम्हें भूलना नहीं चाहिए । वास्तव में इन चित्रों की भी दरकार नहीं है । परन्तु पढ़ाने समय कुछ तो आगे चाहिए ना । कितने चित्र बनते रहते हैं । पाण्डव गवर्मेन्ट के प्लैन देखो कैसे हैं । उस गवर्मेन्ट के भी प्लैन हैं । तुम समझते हो नई दुनिया में सिर्फ भारत ही था, बहुत छोटा था । सारा भारत विश्व का मालिक था । एवरीथिंग न्यु होती है । दुनिया तो एक ही है । एक्टर्स भी वही है, चक्र फिरता जाता है । तुम गिनती करेंगे, इतने सेकण्ड, इतने घण्टे, दिन, वर्ष पूरे हुए फिर चक्र फिरता रहेगा । आजकल करते-करते 5 हजार वर्ष पूरे हो गये हैं । सब सीन-सीनरी, खेलपाल होते आते हैं । कितना बडा बेहद का झाड़ है । झाड़ के पत्ते तो गिन नहीं सकते हैं । यह झाड़ है । इसका फाउन्डेशन देवी देवता धर्म है, फिर यह तीन ट्यूब्स (धर्म) मुख्य निकले हुए है । बाकी झाड़ के पत्ते तो कितने ढेर है । कोई की ताकत नहीं जो गिनती कर सके । इस समय सब धर्मो के झाड़ वृद्धि को पा चुके हैं । यह बेहद का बड़ा झाड़ है । यह सब धर्म फिर नहीं रहेंगे । अभी सारा झाड़ खड़ा है बाकी फाउन्डेशन है नहीं । बनेन ट्री का मिसाल बिल्कुल एक्यूरेट है । यह एक ही वन्डरफुल झाड़ है, बाप ने दृष्टान्त भी ड़ामा में यह रखा है समझाने के लिए । फाउन्डेशन है नहीं । तो यह समझ की बात है । बाप ने तुमको कितना समझदार बनाया है । अभी देवता धर्म का फाउन्डेशन है नहीं । बाकी कुछ निशानियाँ हैं- आटे में नमक । प्राय : यह निशानियाँ बाकी रही हैं । तो बच्चों की बुद्धि में यह सारा ज्ञान आना चाहिए । बाप की भी बुद्धि में नॉलेज है ना । तुमको भी सारा नॉलेज दे आपसमान बना रहे हैं । बाप बीजरूप है और यह उल्टा झाड़ है । यह बडा बेहद का ड़ामा है । अभी तुम्हारी बुद्धि ऊपर चली गई है । तुमने बाप को और रचना को जान लिया है । भल शास्त्रों में है ऋषि-मुनि कैसे जानेंगे । एक भी जानता हो तो परम्परा चले । दरकार ही नहीं । जबकि सद्गति हो जाती है, बीच में कोई भी वापस नहीं जा सकता । नाटक पूरा हो तब तक सब एक्टर्स यहाँ होने हैं, जब तक बाप यहाँ है, जब वहाँ बिल्कुल खाली हो जायेंगे तब तो शिवबाबा की बरात जायेगी । पहले से तो नहीं जाकर बैठेंगे । तो बाप सारी नॉलेज बैठ देते है । यह वर्ल्ड का चक्र कैसे रिपीट होता है । सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग फिर संगम होता है । गायन है परन्तु संगमयुग कब होता है, यह किसको पता नहीं है । तुम बच्चे समझ गये हो - 4 युग हैं । यह है लीप युग, इनको मिडगेट कहा जाता है । कृष्ण को भी मिडगेट दिखाते हैं । तो यह है नॉलेज । नॉलेज को मोड़-तोड़कर भक्ति में क्या बना दिया है । ज्ञान का सारा सूत मूँझा हुआ है । उनको समझाने वाला तो एक ही बाप है । प्राचीन राजयोग सिखलाने लिए विलायत में जाते हैं । वह तो यह है ना । प्राचीन अर्थात् पहला । सहज राजयोग सिखलाने बाप आये हैं । कितना अटेन्शन रहता है । तुम भी अटेन्शन रखते हो कि स्वर्ग स्थापन हो जाए । आत्मा को याद तो आता है ना । बाप कहते हैं यह नॉलेज जो मैं अभी तुमको देता हूँ फिर मैं ही आकर दूँगा । यह नई दुनिया के लिए नया ज्ञान है । यह ज्ञान बुद्धि में रहने से खुशी बहुत होती है । बाकी थोडा टाइम है । अब चलना है । एक तरफ खुशी होती है दूसरे तरफ फिर फील भी होता है । अरे, ऐसा मीठा बाबा हम फिर कल्प बाद देखेगे । बाप ही बच्चों को इतना सुख देते हैं ना । बाप आते ही हैं - शान्तिधाम-सुखधाम में ले जाने । तुम शान्तिधाम-सुखधाम को याद करो तो बाप भी याद आयेगा । इस दुःखधाम को भूल जाओ । बेहद का बाप बेहद की बात सुनाते हैं । पुरानी दुनिया से तुम्हारा ममत्व निकलता जायेगा तो खुशी भी होगी । तुम रिटर्न में फिर सुखधाम में जाते हो । सतोप्रधान बनते जायेंगे । कल्प- कल्प जो बने हैं वही बनेंगे और उनकी ही खुशी होगी फिर यह पुराना शरीर छोड देंगे । फिर नया शरीर लेकर सतोप्रधान दुनिया में आयेंगे । यह नॉलेज खलास हो जायेगी । बातें तो बहुत सहज हैं । रात को सोने समय ऐसे-ऐसे सिमरण करो तो भी खुशी रहेगी । हम यह बन रहे हैं । सारे दिन में हमने कोई शैतानी तो नहीं की? 5 विकारों से कोई विकार ने हमको सताया तो नहीं? लोभ तो नहीं आया? अपने ऊपर जाँच रखनी है । अच्छा! मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग । रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते । धारणा के लिए मुख्य सार:- 1. योगबल से अथाह सुखों वाली दुनिया स्थापन करनी है । इस दुःख की पुरानी दुनिया को भूल जाना है । खुशी रहे कि हम सच खण्ड के मालिक बन रहे हैं । 2. रोज अपनी जाँच करनी है कि सारे दिन में कोई विकार ने सताया तो नहीं? कोई शैतानी काम तो नहीं किया? लोभ के वश तो नहीं हुए। वरदान:-  परमात्म दुलार को प्राप्त करने वाले अब के सो भविष्य के राज दुलारे भव  संगमयुग पर आप भाग्यवान बच्चे ही दिलाराम के दुलार के पात्र हो । यह परमात्म दुलार कोटों में कोई आत्माओं को ही प्राप्त होता है । इस दिन दुलार द्वारा राज दुलारे बन जाते हो । राजदुलारे अर्थात् अब भी राजे और भविष्य के भी राजे | भविष्य से भी पहले अब स्वराज्य अधिकारी बन गये । जैसे भविष्य राज्य की महिमा है एक राज्य, एक धर्म ऐसे अभी सर्व कमेंन्द्रियों पर आत्मा का एक छत्र राज्य है । स्लोगन:-  अपनी सूरत से बाप की सीरत दिखाने वाले ही परमात्म स्नेही हैं | ओम् शान्ति |  

Wednesday, October 29, 2014

Murli-30/10/2014-English

Essence of Murli (H&E): October 30, 2014: Essence: Sweet children, in order to experience unlimited happiness, remain with Baba at every moment. Question: Which children receive a lot of power (taakat) from the Father? Answer: Those who have the faith that they are the ones who will transform the unlimited world, and that they are going to become the masters of the unlimited world, that it is the Father, the Master of the World, Himself, who is teaching them. Such children receive a lot of power. Essence for Dharna: Ask your heart: 1.Do the treasures of happiness that you receive from the Father stay in your intellect? 2.Baba has come to make you into the masters of the world. Therefore, are your activity and your way of speaking to others according to that? Do you ever defame anyone? 3.After making a promise to the Father, do you perform any impure actions? Blessing: May you be a master almighty authority who experiences every power in the practical form according to the time. To be a master means that whatever power you invoke at whatever time, you experience that power at that time in the practical form. As soon as you order it, it becomes present. Let it not be that you order the power of tolerance to come and the power to face comes in front of you. That is not called being a master. Try and see whether the power that you order comes into use at the time you need that power. If there is the difference of even one second, then, instead of victory, there will be defeat. Slogan:To the extent that you have Godly intoxication (nasha) in your intellect, let there be just as much humility (namrata) in your actions. 

Murli-30/10/2014-Hindi

30-10-14          प्रातः मुरली         ओम् शान्ति        “बापदादा”          मधुबन “बेहद की अपार खुशी का अनुभव करने के लिए हर पल बाबा के साथ रहो'       प्रश्न:-    बाप से किन बच्चों को बहुत-बहुत ताकत मिलती है ? उत्तर:- जिन्हें निश्चय है कि हम बेहद विश्व का परिवर्तन करने वाले हैं, हमें बेहद विश्व का मालिक बनना है । हमें पढ़ाने वाला स्वयं विश्व का मालिक बाप है । ऐसे बच्चों को बहुत ताकत मिलती है । ओम् शान्ति | मीठे-मीठे रूहानी बच्चों को वा आत्माओं को रूहानी बाप परमपिता परमात्मा बैठ पढ़ाते हैं और समझाते हैं क्योंकि बच्चे ही पावन बनकर स्वर्ग के मालिक बनने वाले हैं फिर से । सारे विश्व का बाप तो एक ही है । यह बच्चों को निश्चय होता है । सारे विश्व का बाप, सभी आत्माओं का बाप तुम बच्चों को पढ़ा रहे हैं । इतना दिमाग में बैठता है? क्योंकि दिमाग है तमोप्रधान, लोहे का बर्तन, आइरन एजड । दिमाग आत्मा में होता है । तो इतना दिमाग में बैठता है? इतनी ताकत मिलती है समझने की कि बरोबर बेहद का बाप हमको पढ़ा रहे हैं, हम बेहद विश्व को पलटते हैं । इस समय बेहद सृष्टि को दोजक कहा जाता है । क्या यह समझते हो कि गरीब दोजक में हैं बाकी सन्यासी, साहूकार, बड़े मर्तबे वाले बहिश्त में हैं? बाप समझाते हैं इस समय जो भी मनुष्यमात्र हैं सब दोजक में हैं । यह सब समझने की बातें हैं कि आत्मा कितनी छोटी है । इतनी छोटी आत्मा में सारी नॉलेज ठहरती नहीं है या भुला देते हो? विश्व की सर्व आत्माओं का बाप तुम्हारे सम्मुख बैठ तुमको पढ़ा रहे हैं | सारा दिन बुद्धि में यह याद रहता है कि बरोबर बाबा हमारे साथ यहाँ हैं? कितना समय बैठता है? घण्टा, आधा घण्टा या सारा दिन? यह दिमाग में रखने की भी ताकत चाहिए । ईश्वर परमपिता परमात्मा तुमको पढ़ाते हैं । बाहर में जब अपने घरों में रहते हो तो वहाँ साथ नहीं है । यहाँ प्रैक्टिकल में तुम्हारे साथ हैं । जैसे कोई का पति बाहर में, पत्नी यहाँ हैं तो ऐसे थोड़ेही कहेगी कि हमारे साथ है । बेहद का बाप तो एक ही है । बाप सबमें तो नहीं है ना । बाप जरूर एक जगह बैठता होगा । तो यह दिमाग में आता है कि बेहद का बाप हमको नई दुनिया का मालिक बनाने के लायक बना रहे हैं? दिल में इतना अपने को लायक समझते हो कि हम सारे विश्व के मालिक बनने वाले हैं? इसमें तो बहुत खुशी की बात है । इससे जास्ती खुशी का खजाना तो कोई को मिलता नहीं । अभी तुमको मालूम पड़ा है यह बनने वाले हैं । यह देवतायें कहाँ के मालिक हैं, यह भी समझते हो । भारत में ही देवतायें होकर गये हैं । यह तो सारे विश्व का मालिक बनने वाले हैं । इतना दिमाग में है? वह चलन है? वह बातचीत करने का ढंग है, वह दिमाग है? कोई बात में झट गुस्सा कर दिया, किसको नुकसान पहुँचाया, किसकी ग्लानि कर दी, ऐसी चलन तो नहीं चलते? सतयुग में यह कभी कोई की ग्लानि थोड़ेही करते हैं । वहाँ ग्लानि के छी-छी ख्यालात वाले होंगे ही नहीं । बाप तो बच्चों को कितना जोर से उठाते हैं । तुम बाप को याद करो तो पाप कट जाएंगे । तुम हाथ उठाते हो परन्तु तुम्हारी ऐसी चलन है? बाप बैठ पढ़ाते हैं, यह दिमाग में जोर से बैठता है? बाबा जानते हैं बहुतों का नशा सोडावाटर हो जाता है । सबको इतनी खुशी का पारा नहीं चढ़ता है । जब बुद्धि में बैठे तब नशा चढ़े । विश्व का मालिक बनाने के लिए बाप ही पढ़ाते हैं । यहाँ तो सब हैं पतित, रावण सम्प्रदाय । कथा है ना - राम ने बन्दरों की सेना ली । फिर यह-यह किया । अभी तुम जानते हो बाबा रावण पर जीत पहनाकर लक्ष्मी-नारायण बनाते हैं । यहाँ तुम बच्चों से कोई पूछते हैं, तुम फट से कहेंगे हमको भगवान पढ़ाते हैं । भगवानुवाच, जैसे टीचर कहेंगे हम तुमको बैरिस्टर अथवा फलाना बनाते हैं । निश्चय से पढ़ाते हैं और वह बन जाते हैं । पढ़ने वाले भी नम्बरवार होते हैं ना । फिर पद भी नम्बरवार पाते हैं, यह भी पढ़ाई है । बाबा एम आज्जेक्ट सामने दिखा रहे हैं । तुम समझते हो इस पढ़ाई से हम यह बनेंगे । खुशी की बात है ना । आई .सी .एस. पढ़ने वाले भी समझेंगे - हम यह पढ़कर फिर यह करेंगे, घर बनाएंगे, ऐसा करेंगे । बुद्धि में चलता है । यहाँ फिर तुम बच्चों को बाप बैठ पढ़ाते हैं । सबको पढना है, पवित्र बनना है । बाप से प्रतिज्ञा करनी है कि हम कोई भी अपवित्र कर्म नहीं करेंगे । बाप कहते हैं अगर कोई उल्टा काम कर लिया तो की कमाई चट हो जायेगी । यह मृत्युलोक पुरानी दुनिया है । हम पढ़ते हैं नई दुनिया के लिए । यह पुरानी दुनिया तो खत्म हो जानी है । सरकमस्टांश भी ऐसे हैं । बाप हमको पढ़ाते ही हैं अमरलोक के लिए । सारी दुनिया का चक्र बाप समझाते हैं । हाथ में कोई भी पुस्तक नहीं है, ओरली ही बाप समझाते हैं । पहली-पहली बात बाप समझाते हैं - अपने को आत्मा निश्चय करो । आत्मा भगवान बाप का बच्चा है । परमपिता परमात्मा परमधाम में रहते हैं । हम आत्मायें भी वहाँ रहती हैं । फिर वहाँ से नम्बरवार यहाँ आते जाते हैं पार्ट बजाने के लिए । यह बडी बेहद की स्टेज हैं । इस स्टेज पर पहले एक्टर्स पार्ट बजाने भारत में, नई दुनिया में आते हैं । यह उन्हों की एक्टिविटी है । तुम उनकी महिमा भी गाते हो । क्या उन्हों को मल्टी-मिल्युनर कहेंगे? उन लोगों के पास तो अनगिनत अथाह धन रहता है । बाप तो ऐसे कहेंगे ना-यह लोग क्योंकि बाप तो बेहद का है । यह भी ड्रामा बना हुआ है । तो जैसे शिवबाबा ने इन्हों को ऐसा साहूकार बनाया तो भक्तिमार्ग में फिर उनका (शिव का) मन्दिर बनाते हैं पूजा के लिए । पहले-पहले उनकी पूजा करते हैं जिसने पूज्य बनाया । बाप रोज-रोज समझाते तो बहुत हैं, नशा चढ़ाने के लिए । परन्तु नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार जो समझते हैं, वह सर्विस में लगे रहते हैं तो ताजे रहते हैं । नहीं तो बांसी हो जाते हैं । बच्चे जानते हैं बराबर यह भारत में राज्य करते थे तो और कोई धर्म नहीं था । डीटीज्म ही थी । फिर बाद में और- और धर्म आये हैं । अभी तुम समझते हो यह सृष्टि का चक्र कैसे फिरता है । स्कूल में एम ऑब्जेक्ट तो चाहिए ना । सतयुग आदि में यह राज्य करते थे फिर 84 के चक्र में आये हैं । बच्चे जानते हैं यह है बेहद की पढ़ाई । जन्म-जन्मान्तर तो हद की पढ़ाई पढ़ते आये हो, इसमें बड़ा पक्का निश्चय चाहिए । सारे सृष्टि को पलटाने वाला, रिज्युवनेट करने वाला अर्थात् नर्क को स्वर्ग बनाने वाला बाप हमको पढ़ा रहे हैं । इतना जरूर है मुक्तिधाम तो सब जा सकते हैं । स्वर्ग में तो सभी नहीं आएंगे । यह अब तुम जानते हो हमको बाप इस विषय सागर वेश्यालय से निकालते हैं । अभी बरोबर वेश्यालय है । कब से शुरू होता है, यह भी तुम जान चुके हो । 2500 वर्ष हुआ जब यह रावण राज्य शुरू हुआ है । भक्ति शुरू हुई है । उस समय देवी-देवता धर्म वाले ही हैं, वह वाम मार्ग में आ गये । भक्ति के लिए ही मन्दिर बनाते हैं । सोमनाथ का मन्दिर कितना बड़ा बनाया हुआ है । हिस्ट्री तो सुनी है । मन्दिर में क्या था! तो उस समय कितने धनवान होंगे! सिर्फ एक मन्दिर तो नहीं होगा ना । हिस्ट्री में करके एक का नाम डाला है । मन्दिर तो बहुत से राजायें बनाते हैं । एक-दो को देख पूजा तो सब करेंगे ना । ढेर मन्दिर होंगे । सिर्फ एक को तो नहीं लूटा होगा । दूसरे भी मन्दिर आसपास होंगे । वहाँ गाँव कोई दूर-दूर नहीं होते हैं । एक-दो के नजदीक ही होते हैं क्योंकि वहाँ ट्रेन आदि तो नहीं होगी ना । बहुत नजदीक एक-दो के रहते होंगे फिर आहिस्ते- आहिस्ते सृष्टि फैलती जाती है । अभी तुम बच्चे पढ़ रहे हो । बड़े ते बड़ा बाप तुमको पढ़ाते हैं । यह तो नशा होना चाहिए ना । घर में कभी रोना पीटना नहीं है । यहाँ तुमको दैवी गुण धारण करने हैं । इस पुरूषोत्तम संगमयुग में तुम बच्चों को पढ़ाया जाता है । यह है बीच का समय जबकि तुम चेन्ज होते हो । पुरानी दुनिया से नई दुनिया में जाना है । अभी तुम पुरूषोत्तम संगमयुग पर पढ़ रहे हो । भगवान तुमको पढ़ाते हैं । सारी दुनिया को पलटाते हैं । पुरानी दुनिया को नया बना देते हैं, जिस नई दुनिया का फिर तुमको मालिक बनना है । बाप बांधा हुआ है तुमको युक्ति बताने के लिए । तो फिर तुम बच्चों को भी उस पर अमल करना है । यह तो समझते हो हम यहाँ के रहने वाले नहीं है । तुम यह थोड़ेही जानते थे कि हमारी राजधानी थी । अभी बाप ने समझाया है-रावण के राज्य में तुम बहुत दुःखी हो । इसको कहा ही जाता है विकारी दुनिया । यह देवतायें हैं सम्पूर्ण निर्विकारी । अपने को विकारी कहते हैं । अब यह रावण राज्य कब से शुरू हुआ, क्या हुआ ज़रा भी किसको पता नहीं है । बुद्धि बिल्कुल तमोप्रधान है । पारसबुद्धि सतयुग में थे, तो विश्व के मालिक थे, अथाह सुखी थे । उसका नाम ही है सुखधाम । यहाँ तो अथाह दु :ख हैं । सुख की दुनिया और दु :ख की दुनिया कैसे है-यह भी बाप समझाते हैं । सुख कितना समय, दु :ख कितना समय चलता है, मनुष्य तो कुछ नहीं जानते । तुम्हारे में भी नम्बरवार समझते रहते हैं । समझाने वाला तो है बेहद का बाप । कृष्ण को बेहद का बाप थोड़ेही कहेंगे । दिल से लगता ही नहीं । परन्तु किसको बाप कहें-कुछ भी समझते नहीं । भगवान समझाते हैं मेरी ग्लानि करते हैं, मैं तुमको देवता बनाता हूँ, मेरी कितनी ग्लानि की है फिर देवताओं की भी ग्लानि कर दी है, इतने मूढ़मती मनुष्य बन पड़े हैं । कहते हैं भज गोविन्द..... । बाप कहते हैं-हे मूढ़मती, गोविन्द-गोविन्द, राम- राम कहते बुद्धि में कुछ आता है कि हम किसको भजते हैं? पत्थरबुद्धि को मूढ़मती ही कहेंगे । बाप कहते हैं अब मैं तुमको विश्व का मालिक बनाता हूँ । बाप सर्व का सद्गति दाता है । बाप समझाते हैं तुम अपने परिवार आदि में कितने फँसे हुए हो! भगवान जो कहते हैं वह तो बुद्धि में लाना चाहिए परन्तु आसुरी मत पर हिरे हुए हैं तो ईश्वरीय मत पर चलें कैसे! गोविन्द कौन है, क्या चीज है, वह भी जानते नहीं । बाप समझाते हैं तुम कहेंगे बाबा आपने अनेक बार हमें समझाया है । यह भी ड्रामा में नूँध है, बाबा हम फिर से आपसे यह वर्सा ले रहे हैं । हम नर से नारायण जरूर बनेंगे । स्टूडेंट को पढ़ाई का नशा जरूर रहता है, हम यह बनेंगे । निश्चय रहता है । अब बाप कहते हैं तुमको सर्वगुण सम्पन्न बनना है । कोई से क्रोध आदि नहीं करना है । देवताओं में 5 विकार होते नहीं । श्रीमत पर चलना चाहिए । श्रीमत पहले-पहले कहती है अपने को आत्मा समझो । तुम आत्मा परमधाम से यहाँ आई हो पार्ट बजाने, यह तुम्हारा शरीर विनाशी है । आत्मा तो अविनाशी है । तो तुम अपने को आत्मा समझो-मैं आत्मा परमधाम से यहॉ आई हूँ पार्ट बजाने । अभी यहाँ दु :खी होते हो तब कहते हो मुक्तिधाम में जावें । परन्तु तुमको पावन कौन बनाये? बुलाते भी एक को ही हैं, तो वह बाप आकर कहते हैं-मेरे मीठे-मीठे बच्चों अपने को आत्मा समझो, देह नहीं समझो । मैं आत्माओं को बैठ समझाता हूँ । आत्मायें ही बुलाती हैं-हे पतित-पावन आकर पावन बनाओ । भारत में ही पावन थे । अब फिर बुलाते हैं - पतित से पावन बनाकर सुखधाम में ले चलो । कृष्ण के साथ तुम्हारी प्रीत तो है । कृष्ण के लिए सबसे जास्ती व्रत नेम आदि कुमारियाँ, मातायें रखती हैं । निर्जल रहती हैं । कृष्णपुरी अर्थात् सतयुग में जाये । परन्तु ज्ञान नहीं है इसलिए बड़ा हठ आदि करते हैं । तुम भी इतना करते हो, कोई को सुनाने के लिए नहीं, खुद कृष्णपुरी में जाने के लिए । तुमको कोई रोकता नहीं है । वो लोग गवर्नमेंट के आगे फास्ट आदि रखते हैं, हठ करते हैं-तंग करने के लिए । तुमको कोई के पास धरना मारकर नहीं बैठना है । न कोई ने तुमको सिखाया है । श्रीकृष्ण तो है सतयुग का फर्स्ट प्रिन्स । परन्तु यह कोई को भी पता नहीं पड़ता । कृष्ण को वह द्वापर में ले गये हैं । बाप समझाते हैं-मीठे-मीठे बच्चों, भक्ति और ज्ञान दो चीज़ें अलग हैं । ज्ञान है दिन, भक्ति है रात । किसकी? ब्रह्मा की रात और दिन । परन्तु इनका अर्थ न समझते हैं गुरू, न उनके चेले । ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का राज़ बाप ने तुम बच्चों को समझाया है । ज्ञान दिन, भक्ति रात और उसके बाद है वैराग्य । वह जानते नहीं । ज्ञान, भक्ति, वैराग्य अक्षर एक्यूरेट है, परन्तु अर्थ नहीं जानते । अभी तुम बच्चे समझ गये हो, ज्ञान बाप देते हैं तो उससे दिन हो जाता है । भक्ति शुरू होती तो रात कहा जाता है क्योंकि धक्का खाना पड़ता है । ब्रह्मा की रात सो ब्राह्मणों की रात, फिर होता है दिन । ज्ञान से दिन, भक्ति से रात । रात में तुम बनवास में बैठे हो फिर दिन में तुम कितना धनवान बन जाते हो । अच्छा! मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमोर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते । धारणा के लिए मुख्य सार:- अपने दिल से पूछना है १. बाप से इतना जो खुशी का खजाना मिलता है वह दिमाग में बैठता है? २.बाबा हमें विश्व का मालिक बनाने आये हैं तो ऐसी चलन है? बातचीत करने का ढंग ऐसा है? कभी किसी की ग्लानि तो नहीं करते? ३.बाप से प्रतिज्ञा करने के बाद कोई अपवित्र कर्म तो नहीं होता है? वरदान:- समय प्रमाण हर शक्ति का अनुभव प्रैक्टिकल स्वरूप में करने वाले मास्टर सर्वशक्तिमान भव    मास्टर का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो । आर्डर किया और हाजिर । ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे । तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी । स्लोगन:-  बुद्धि में जितना ईश्वरीय नशा हो, कर्म में उतनी ही नम्रता हो ।     ओम् शान्ति |

Murli-29/10/2014-English

Essence: Sweet children, your pilgrimage is of the intellect. It is this that is called the spiritual pilgrimage. You 
consider yourselves to be souls, not bodies. To consider yourself to be a body means to dangle upside down.  

Question: Which type of respect do people receive through the pomp of Maya?
Answer: Devilish respect. People give someone a little respect today, but they will disrespect that person tomorrow 
and insult him. Maya has been disrespectful to and insulted everyone and made them impure. The Father has come 
to make you those with divine respect.

Om Shanti 
To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, 
the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children. To the sweetest, beloved, long-lost 
and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual 
Father says namaste to the spiritual children.
 
Essence for Dharna:

1. Renounce the habit of stumbling from door to door and study God’s teachings with attention. Never be absent. 
Definitely become a teacher like the Father. Study and then also teach others.

2. Listen to the true story of the true Narayan and become Narayan from an ordinary human. You have to make 
yourself respectful. Never become influenced by evil spirits (vices) and thereby lose your respect. 
 
Blessing: May you be a jewel of contentment and with your speciality of contentment in relationships and connections 
become threaded in the rosary.   

The confluence age is the age of contentment. Those who are content with themselves and who always remain content 
in their relationships and connections and make others content become threaded in the rosary because the rosary is 
created through relationships. If the beads do not have any connection with one another, the rosary cannot be created. 
Therefore, be a jewel of contentment and remain constantly content and make all others content. The meaning of a family 
is to remain content and make others content. Let there be no type of complication.

Slogan: It is the duty of obstacles to come whereas your duty is to be a destroyer of obstacles.  

Om Shanti